Kanke, Ranchi, Jharkhand

( A State Government University )

बीएयू के एसोसिएट डीन डॉ केके झा सहित पांच कर्मी सेवानिवृत्त

बीएयू के एसोसिएट डीन डॉ केके झा सहित पांच कर्मी सेवानिवृत्त

बिरसा कृषि विश्वविद्यालय में बुधवार को सेवानिवृत्ति पर पांच वैज्ञानिक और कर्मियों को विदाई दी गई। 31 दिसंबर को अवकाश ग्रहण करनेवालों में बागवानी विभाग के अध्यक्ष सह बागवानी महाविद्यालय, खूंटपानी (पश्चिमी सिंहभूम) के एसोसिएट डीन डॉ केके झा, वानिकी संकाय के वनवर्धन एवं कृषि वानिकी विभाग के सहायक प्राध्यापक वी शिवाजी, कृषि संकाय पुस्तकालय में कार्यरत प्रयोगशाला सहायक राजकुमार नायक, कृषि संकाय कैंटीन में कार्यरत कुक और बीएयू में कार्यरत सबसे लंबे व्यक्ति के रूप में चिन्हित लच्छू राम तथा कुलपति कोषांग में कार्यरत कुक नथुनी महतो शामिल हैं।

विश्वविद्यालय के प्रबंध पर्षद कक्ष में कुलपति डॉ ओंकार नाथ सिंह की अध्यक्षता में विदाई समारोह हुआ। इसमें कुलपति ने डॉ केके झा, वी शिवाजी और नथुनी महतो को स्‍मृति चिह्न देकर सम्मानित किया। उनके स्वस्थ, यशस्वी जीवन की कामना की। कार्यक्रम का संचालन डॉ पीके सिंह ने किया। अवकाश प्राप्त कर रहे कर्मियों के सेवा इतिहास पर प्रकाश डाला।

क‌षि संकाय, वानिकी संकाय, उद्यान विभाग और बागवानी महाविद्यालय की ओर से भी विदाई समारोह आयोजित किया गया। वक्ताओं ने कहा कि अपने लगभग 35 वर्षों के कार्यकाल में डॉ केके झा ने राज्य में बागवानी को बढ़ाने में बहुत महत्वपूर्ण योगदान दिया। विशेषकर फल एवं फूलों की खेती करनेवाले किसानों एवं कृषि उद्यमियों से उनका हर जिले में प्रत्यक्ष संपर्क था, जिनका वह सतत मार्गदर्शन करते थे। उन्होंने 2 वर्ष तक अपर निदेशक प्रसार शिक्षा के रूप में भी जिम्मेदारी निभाई।

खेतों में प्रत्यक्ष काम करनेवाले श्रमिकों से उन्हें विशेष लगाव रहा। इसलिए डॉ झा ने बुधवार को अपने विदाई समारोह में 30 से अधिक श्रमिकों को स्टील का टिफिन बॉक्स देकर उनका सम्मान और उत्साहवर्धन किया। विभाग के कार्यरत चार कर्मियों को भी उन्होंने शाल प्रदान कर उनकी सेवाओं की सराहना की। डॉ झा ने विश्वविद्यालय मैं दैनिक मजदूरों के लिए बन रहे श्रमिक कल्याण निधि के लिए भी दो लाख रुपए का व्यक्तिगत योगदान दिया है।

कृषि संकाय में अधिष्ठाता डॉ एमएस यादव के नेतृत्व में डॉ झा के लिए विदाई समारोह आयोजित किया गया। वनवर्धन एवं कृषिवानिकी विभाग के शिक्षक वी शिवाजी ने लगभग 37 वर्षों तक शिक्षण, शोध और प्रसार शिक्षा में अपनी सेवाएं दी और केवल काम में विश्वास रखनेवाले एक मितभाषी, निर्विवाद वैज्ञानिक के रूप में जाने जाते रहे।

प्रबंध पर्षद कक्ष में आयोजित समारोह में विश्वविद्यालय के निदेशक, अधिष्ठाता, वरिष्ठ पदाधिकारी, डॉ डीके शाही, डॉ ऋषिपाल सिंह, डॉ ए वदूद, डॉ एसके पाल, डॉ एमएच सिद्दीकी, डॉ एमके गुप्ता, डॉ नरेंद्र कुदादा, डॉ सुशील प्रसाद, डॉ जगरनाथ उरांव, राकेश रोशन, डॉ सोहन राम, डॉ मणिगोपा चक्रवर्ती, डॉ शम्भू नाथ कर्मकार, डॉ शैलेश चट्टोपाध्याय आदि उपस्थित थे।