Kanke, Ranchi, Jharkhand

( A State Government University )

बिरसा कृषि विश्वविद्यालय में मनाई गई कार्तिक उरांव जयंती

प्रसिद्ध शिक्षाविद, समाज सुधारक, टेक्नोक्रेट और राजनेता डॉ कार्तिक उरांव की जयंती बिरसा कृषि विश्वविद्यालय में धूमधाम से बनाई गई।
विश्वविद्यालय के वरिष्ठ पदाधिकारियों, शिक्षकों और कर्मियों ने मुख्यालय स्थित उनकी आदमकद प्रतिमा पर माल्यार्पण किया तथा बोर्ड रूम में एक स्मृति सभा का आयोजन किया गया।

विश्वविद्यालय के कुलसचिव एवं वानिकी संकाय के अध्यक्षता डॉ एमएस मलिक ने कहा कि लोहरदगा से तीन बार सांसद, एक बार विधायक और केंद्र में कई बार मंत्री रहे डॉ उरांव ने जनजातीय समाज के सांस्कृतिक उत्थान एवं उनकी पहचान को सुदृढ़ करने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए। सांस्कृतिक नृत्य और संगीत को उसकी पारंपरिक गरिमा के साथ संरक्षित संवर्धित करने के लिए वे युवा-युवतियों को बराबर प्रोत्साहित करते थे और कहते थे ‘जे नाची से बाची’।

अनुसूचित जनजातियों की जमीन की सुरक्षा के लिए उन्होंने भूदान आंदोलन का भी विरोध किया जिससे समाज के लोग उन्हें अपना मसीहा मानने लगे। राज्य के पठारी क्षेत्र के लिए अलग बिरसा कृषि विश्वविद्यालय की स्थापना में भी उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा।

डॉ मलिक ने कहा कि अगले साल कार्तिक बाबू की सौवीं जयंती विश्वविद्यालय में बड़े पैमाने पर मनाई जाएगी।

कार्यक्रम का संचालन वानिकी संकाय के डॉ बसंत चंद्र उरांव ने तथा जबकि धन्यवाद ज्ञापन प्रसार शिक्षा निदेशक डॉ जगरनाथ उरांव ने किया।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के वरिष्ठ पदाधिकारी डॉ सुशील प्रसाद, डॉ पीके सिंह, डॉ बीके अग्रवाल तथा डॉ प्रभात रंजन उरांव ने भी कार्तिक बाबू के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डाला।