Kanke, Ranchi, Jharkhand

( A State Government University )

परंपरागत आहार और जीवन शैली बनाये रखकर सेहत अच्छी हो सकती है : डॉ उरांव

परंपरागत आहार और जीवन शैली बनाये रखकर सेहत अच्छी हो सकती है : डॉ उरांव

बिरसा कृषि विश्वविद्यालय में स्वास्थ्य एवं पोषण की महत्ता पर एकदिवसीय जागरुकता कार्यक्रम का आयोजन शुक्रवार को किया गया। आईसीएआर-फार्मर्स फर्स्ट प्रोग्राम परियोजना एवं एनएसएस सेल के संयुक्त तत्वावधान में यह हुआ। कार्यक्रम में परियोजना से जुड़े नगड़ी प्रखंड के चिपड़ा एवं कुडलॉन्ग गांव के 35 किसानों के साथ विवि में भ्रमण पर आये झारखंड एग्रीकल्चर मशीनरी टूल्स ट्रेनिंग सेंटर में प्रशिक्षणरत 20 लोग भी शामिल हुए।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए निदेशक प्रसार शिक्षा डॉ जगरनाथ उरांव ने कहा कि पोषणयुक्त पदार्थ एवं स्वास्थ्य जलवायु के मामले में झारखंड समृद्ध है। परंपरागत आहार एवं जीवन शैली को बनाये रखते हुए सेहत अच्छी रखी जा सकती है। स्थानीय तौर पर सहज उपलब्ध सस्ते पोषक फल एवं साग-सब्जियों का प्रयोग करें। उन्होंने कहा कि फार्मर्स फर्स्ट प्रोग्राम परियोजना में तकनीकी हस्तक्षेपों के अवयवों में पोषण पर अधिक जोर दिया गया है। इसके कृषि विविधिकरण, पशुपालन, पोषण वाटिका, प्रसंस्करण एवं मूल्यवर्धन के कार्यक्रम नगड़ी प्रखंड के चिपडा एवं कुदलॉन्ग गांव के आदिवासी किसानों की पोषण एवं आजीविका सुरक्षा में कारगर साबित हो रही है।

मुख्य अतिथि डीन एग्रीकल्चर डॉ एमएस यादव ने स्वयं एवं परिवार के बेहतर स्वास्थ्य के लिए पोषण सुरक्षा की महत्ता को बताया। कहा कि हमारे शरीर के सभी अंगों का स्वास्थ्य पोषण से जुड़ा है। इसकी अनदेखी स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होगी। पोषण युक्त आहार के सेवन से पूरे परिवार में जागरुकता समय की सबसे बड़ी जरूरत है।

मौके पर सामुदायिक विज्ञान विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ रेखा सिन्हा ने कहा कि झारखंड की महिलाओं में एनीमिया एक बड़ी समस्या है। महिला एवं बच्चों में जिंक की कमी की स्थिति चिंताजनक है। उन्होंने लोगों को दैनिक भोजन में संतुलित आहार को शामिल और चावल एवं गेहूं के आलावा आहार में मोटे आनाज, स्थानीय साग-सब्जी एवं फल का सेवन करने की सलाह दी। पोषण सुरक्षा के लिए किसानी में कृषि विविधिकरण, पोषण बागवानी, पशुपालन, मत्स्यपालन, बेकयार्ड पोल्ट्री फार्मिंग एवं मधुमख्खी पालन को शामिल करने का सुझाव दिया।

डीन वेटनरी डॉ सुशील प्रसाद ने पशु उत्पादित आहार से उर्जा की पूर्ति एवं महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने मांस के आलावा प्रतिदिन दूध का सेवन करने की सलाह दी। मौके पर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी डॉ उमा शंकर वर्मा, एसोसिएट डीन ई डीके रूसिया एवं एनएसएस को-ऑर्डिनेटर डॉ बीके झा ने भी स्वास्थ्य एवं पोषण की महत्ता पर अपने विचार रखें।

स्वागत करते हुए डॉ निभा बाड़ा ने खाद्यान उत्पादन, स्वास्थ्य एवं पोषण के महत्त्व की जानकारी दी। धन्यवाद डॉ अरुण कुमार तिवारी किया। मौके पर डॉ रविन्द्र कुमार, डॉ सीएस सिंह, डॉ नेहा पांडे, आलोका बागे, निर्मल कुमार, राजेश सिंह आदि मौजूद थे।