बीएयू कुलपति ने जीरो बजट प्राकृतिक खेती तकनीक मॉडल को देखा

बीएयू कुलपति डॉ परविंदर कौशल ने रविवार को हरियाणा स्थित गुरूकुल कुरूक्षेत्र के 200 एकड़ भूमि में फैले जीरो बजट प्राकृतिक खेती तकनीक मॉडल को देखा। झारखंड के प्रतिनिधि के रूप में 7 और 8 अक्टूबर को गुरूकुल कुरूक्षेत्र में आयोजित इस कार्यक्रम में उन्‍होंने भाग लिया। मॉडल के अवलोकन के लिए हरिणा के राज्यपाल आचार्य देवब्रत ने सभी प्रदेश के कृषि मंत्री और कृषि विश्वविद्यालयों के कुलपतियों को बुलाया था। कार्यक्रम में कई प्रदेश के कृषि मंत्री सहित आईसीएआर महानिदेशक डॉ त्रिलोचन महापात्र एवं कृषि विश्वविद्यालयों के कुलपतियों ने भी भाग लिया।

कुलपति डॉ कौशल ने बताया कि देश के राज्यपालों के सम्मलेन में जीरो बजट प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने पर चर्चा हुई थी। इस मॉडल के जनक प्रख्यात कृषि वैज्ञानिक डॉ सुभाष पालेकर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भेंट कर वर्ष 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने में कारगर तकनीक होने की बात कही थी। जीरो बजट प्राकृतिक खेती के बारे में डॉ कौशल ने कहा कि इस तकनीक से खेती में कई फायदे हैं। इससे खेत की उर्वरा सकती में बढ़ोतरी, पर्यावरण की सुरक्षा, 70-80 प्रतिशत तक सिंचाई जल की बचत होती है।

देशी नस्ल के गाय का संरक्षण, स्वास्थ्यवर्धक फल, शाक और सब्जी का अधिक उत्पादन के साथ फसलों की बीमारी से बचाव और पहले वर्ष ही पूरा फसल उत्पादन प्राप्त किया जाना संभव है। इसे अपनाने में किसान का एक भी पैसा खर्च नही होता, इसमें उपयोग में लाई जाने वाली सामग्री किसानों के घर में ही उपलब्ध होती है। इसलिए इसे शून्य लागत वाली प्राकृतिक खेती कहा जाता है। अधिक उत्पादन और लाभ और खेती में कम लागत की वजह से किसानो की आय में बढ़ोतरी में यह तकनीक काफी उपयोगी है। झारखंड में तकनीकी हंस्तान्तरण द्वारा किसानों की आय को दोगुनी करने की परिकल्पना को पूरा करने में मदद मिलेगी।