झारखंड में 65 लाख बकरी, जुड़े हैं 17.50 लाख परिवार

बकरीपालन और इसके ब्लैक बंगाल नस्ल के संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए रांची के कांके प्रखंड के चामगुरु गांव में कृषक गोष्ठी रविवार को हुई। इस अवसर पर बकरीपालकों को संबोधित करते हुए बिहार पशुचिकित्सा विश्वविद्यालय, पटना के कुलपति डॉ रामेश्वर सिंह ने कहा कि भारत में बकरीपालन सदियों से ग्रामीण आबादी के आय और लघु रोजगार का साधन रहा है। बढ़ती आबादी और बाजार मांग को देखते हुए इस क्षेत्र में ग्रामीणों के स्वरोजगार और बढ़िया लाभ की बेहतर सम्भावनाएं हैं। उन्होंने कहा कि यह हमारी ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। इसके पालन-पोषण में थोड़ी सावधानी और वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाकर अधिक से अधिक लाभ लिया जा सकता है।

इस अवसर पर मौजूद केन्द्रीय बकरीपालन निदेशालय मथुरा के निदेशक डॉ एमएस चौहान ने कहा कि झारखंड में बकरी की कुल संख्या करीब 65 लाख है। लगभग 17.50 लाख परिवार बकरी पालन से जुड़े हैं। खेती के लिए सिचाई का आभाव को देखते हुए इसे ग्रामीण क्षेत्रों में प्रमुख व्यवसाय के रूप में विकसित किया जा सकता है।

गोष्ठी में डॉ सिंह और डॉ चौहान के द्वारा उपस्थित करीब 60 बकरीपालकों को मिनरल मिक्सचर और टीकाकरण की दवा का मुफ्त वितरण किया गया। इस अवसर पर बीएयू के निदेशक प्रसार डॉ जगरनाथ उरांव और बकरीपालन विशेषज्ञ/ वैज्ञानिक डॉ सुशील प्रसाद ने राज्य में बकरीपालन के क्षेत्र में किए जा रहे शोध, सुविधाओं और प्रयासों की जानकारी दी।

बकरी की ब्लैक बंगाल नस्ल के संरक्षण की आवश्यकता बताई। डॉ प्रसाद ने बताया कि यह कार्यक्रम आईसीएआर की अखिल भारतीय समन्वित परियोजना बकरी पालन के अधीन आयोजित किया गया। बीएयू में वर्ष 2009 से संचालित इस परियोजना से राज्य में बकरी की उन्नत नस्ल ब्लैक बंगाल के संरक्षण को काफी बढ़ावा मिला है।

 

वेटनरी फार्म और ग्रामीण बकरीपालन गृह का निरीक्षण

पहले आईसीएआर रीजनल कमेटी में भाग लेने आये बिहार पशुचिकित्सा विश्वविद्यालय, पटना के कुलपति डॉ रामेश्वर सिंह और केन्द्रीय बकरीपालन निदेशालय, मथुरा के निदेशक डॉ एमएस चौहान ने बीएयू के वेटनरी फार्म में बकरी, कुक्कुट एवं गाय इकाई का निरीक्षण और किये जा रहे शोध एवं प्रसार कार्यो की जानकारी ली। उन्‍होंने चामगुरु गांव में बकरी पालकों के बकरी गृह को भी देखा और परियोजना अधीन किए जा रहे कार्यो की सराहना की।

Source: http://www.dainikjharkhand.com/jharkhand-news/ranchi/65-lakh-goats-in-jharkhand-17-50-lakh-families-are-connected.html