जल्‍द आपकी थाली में जुड़ेंगे कुछ और व्‍यंजन

आप किसी रेस्‍तरां या होटल में परिवार के साथ गए हों। बेटर ऑर्डर लेने आया। आपको मेनू सौंपा। आप मशरुम के शौकीन हैं। उसमें आपको विकल्‍प मिले तो आप चौंके नहीं। जी हां, ये जल्‍द मुमकिन होगा। आपके पास विकल्‍प होगा कि आप सफेद मशरुम खाएं या गुलाबी। रांची के कांके स्थित बिरसा कृषि विश्‍वविद्यालय में जल्‍द की गुलाबी और बटन मशरुम मिलने लगेगा।

हाल में हिमाचल प्रदेश के सोलन स्थित मशरुम अनुसंधान निदेशालय से बीएयू ने पिंक मशरुम स्पॉन (बीज) लाकर झारखंड के अनुकुल जलवायु में उत्पादन करने में सफलता पाई हैI बीएयू के कुलपति डॉ परविन्दर कौशल ने बताया कि गुलाबी मशरुम का स्वाद बेहतर है। अच्छे होटलों और रेस्तरा में इसकी मांग है। राज्य में उत्पादन की संभावनाओं के देखते हुए विश्वविद्यालय गुलाबी मशरुम की व्यावसायिक खेती को बढ़ावा देने का प्रयास कर रहा है। बीएयू द्वारा संचालित डिप्लोमा कोर्स एवं मशरुम प्रशिक्षण के माध्यम से इसकी उत्पादन तकनीकी लोगों को बताई जाएगी। इसके उत्पादन के लिए आवश्यक बीज की आपूर्ति भी जल्द शुरू की जाएगी।

प्रभारी डॉ नरेंद्र कुदादा ने बताया कि यह बटन मशरुम से भिन्न और इसकी उत्पादन विधि ऑयस्टर मशरुम के समान होती है। कच्चा होने पर गुलाबी ऑयस्टर मशरूम का रंग बहुत गुलाबी होता है। पकाए जाने पर यह नारंगी ब्राउन रंग में बदल जाता है। इस प्रकार के मशरुम का छत्ता पंखे या हथेली जैसे फैला होता है। इसकी वजह से पैंकिंग और इसे एक स्थान से दूसरे स्थान तक भेजने में कठिनाई होती है। छत्ता टूट–फूट जाता है, जिससे बाजार में इसका कम मूल्य मिलता है। इसका आकार लगभग दो से पांच सेंटीमीटर तक होता है। वसंत मौसम की समाप्ति के बाद इसका उत्पादन शुरू किया जाता है।

इसमें पौष्टिक तत्व की मात्रा अन्य मशरूम के समान ही होता है। यह एर्गोथियोनिन के सबसे अच्छे मशरूम स्रोतों में से एक है, जो एक एंटीऑक्सिडेंट के रूप में धमनी में प्लाक बिल्ड-अप को रोककर कार्डियोवैस्कुलर बीमारी को कम करता है। यह प्रोटीन, फाइबर, पोटाशियम, विटामिन बी और फोलेट का अच्छा स्रोत भी है। इसे भोजन में सब्जियों के साथ, पास्ता व्यंजन या सूप में जोड़ा जा सकता है। सफेद सॉस और होटलों के व्यंजनों में इसे काफी पसंद किया जाता हैं। इसे ठंडी जगह में संग्रहित कर करीब एक सप्ताह तक संरक्षित रखा जा सकता है। लंबे समय तक संरक्षण के लिए इसे सुखाकर रखा जा सकता है।

बीएयू वीसी डॉ पी कौशल

 

बीएयू के मशरुम उत्पादन इकाई में प्रशिक्षण कार्यक्रमों, डिप्लोमा और सर्टिफिकेट कोर्स के माध्यम से मशरुम उत्पादन की तकनीकी जानकारी दी जाती है। यहां उत्पादित विभिन्न किस्मों के मशरुम स्पॉन (बीज) की उच्च गुणवतायुक्त की वजह से काफी मांग है। झारखंड और अन्य राज्यों के लोग अग्रिम मांग की आवश्यकता आधार पर विभिन्न प्रकार के मशरुम का स्पॉन (बीज) प्राप्त करते हैं। इनमें मौसम आधारित शीतकालीन सफेद बटन मशरुम, समशीतोष्ण कालीन वायस्टर मशरुम (ढींगरी) और ग्रीष्मकालीन धान पुआल मशरुम और सफेद दुधिया मशरुम आदि प्रमुख है। यहां से प्रशिक्षण पाकर युवक और युवतियां विशेषकर कई महिलाओं ने समूह बनाकर मशरुम उत्पादन को रोजगार के रूप अपनाया है। बढ़िया पैसा भी कमा रहे हैं।